Cloud Computing क्या है? — Models, Types और फायदे हिंदी में पूरी जानकारी

Cloud Computing क्या है? — आसान भाषा में पूरी जानकारी

Cloud computing का मतलब है — अपना computer या server ख़रीदने की जगह, किसी और की machines को internet के ज़रिए किराए पर इस्तेमाल करना, और सिर्फ़ उतने का पैसा देना जितना आपने इस्तेमाल किया।

Gmail खोलना भी cloud computing ही है — आपकी mail आपके computer में नहीं, Google के servers पर रखी है। यह concept अचानक नहीं आया; इससे पहले computing के कई models रहे हैं। उन्हें क्रम से समझने पर cloud अपने आप साफ़ हो जाता है।

इस guide में:
- Computing के पाँच models — Desktop से Cloud तक
- Cloud के तीन service types (IaaS, PaaS, SaaS)
- Public, Private और Hybrid cloud में अंतर
- फ़ायदे और असली सीमाएँ

1. Desktop Computing

सबसे पुराना model — एक computer, एक user। सारा software उसी machine पर install होता है और सारा data उसी की disk में रहता है। network की कोई ज़रूरत नहीं।

सीमा साफ़ है: अगर वह machine ख़राब हो जाए तो data भी गया, और दूसरे लोग उस data तक नहीं पहुँच सकते।

Desktop computing model

2. Client-Server Computing

यहाँ एक ताक़तवर computer (server) data और software रखता है, और बाक़ी computers (clients) network से उससे जुड़कर काम करते हैं। office के shared printers और company के accounting software इसी तरह चलते हैं।

फ़ायदा यह कि data एक जगह रहता है और सब उस तक पहुँच सकते हैं। नुक़सान यह कि server बंद हुआ तो पूरा office रुक जाता है।

Client-server computing model

3. Cluster Computing

जब एक server काफ़ी न पड़े, तो कई computers को आपस में जोड़कर एक इकाई की तरह चलाया जाता है। बाहर से देखने पर वे एक ही बड़ी machine लगते हैं।

इनका मक़सद दो होता है — ज़्यादा ताक़त, और यह कि एक machine बंद हो जाए तो काम रुके नहीं।

Cluster computing

4. Grid Computing

Cluster में सब machines एक ही जगह होती हैं। Grid में वे अलग-अलग शहरों या देशों में हो सकती हैं, और मिलकर एक बड़ी problem के टुकड़े हल करती हैं।

वैज्ञानिक शोध में इसका इस्तेमाल होता रहा है — जहाँ गणना इतनी बड़ी होती है कि कोई एक संस्था अकेले नहीं कर सकती।

Grid computing

5. Cloud Computing

Cloud इन सबको एक व्यावसायिक सेवा में बदल देता है। आपको यह जानने की ज़रूरत ही नहीं कि आपका काम किस machine पर चल रहा है — आप बस ज़रूरत बताते हैं, और चंद मिनटों में संसाधन मिल जाते हैं।

Cloud computing

Cloud की तीन service types

Typeआपको क्या मिलता हैरोज़ का उदाहरण
IaaSख़ाली server, storage और network — OS आप ख़ुद डालते हैंAmazon EC2, Google Compute Engine
PaaSतैयार platform जहाँ सिर्फ़ अपना code डालना होता हैGoogle App Engine, Heroku
SaaSपूरा तैयार software, सीधे browser मेंGmail, Google Docs, Zoom

इसे ऐसे समझिए: IaaS ख़ाली ज़मीन है, PaaS बना-बनाया ढाँचा है, और SaaS पूरी तरह तैयार घर जिसमें आप सीधे रहने चले जाते हैं।

Public, Private और Hybrid Cloud

प्रकारकिसका होता हैकब चुनें
PublicGoogle, Amazon, Microsoft जैसी कंपनियों का, सब उपयोग करते हैंशुरुआत में, कम ख़र्च चाहिए
Privateसिर्फ़ एक संस्था के लिएबैंक, अस्पताल — जहाँ data बाहर नहीं जा सकता
Hybridदोनों का मेलसंवेदनशील data अंदर, बाक़ी काम बाहर

फ़ायदे

शुरुआती ख़र्च नहीं: server ख़रीदने की ज़रूरत नहीं, महीने के हिसाब से पैसे देते हैं।
ज़रूरत के हिसाब से घटा-बढ़ा सकते हैं: त्योहार पर traffic बढ़े तो संसाधन बढ़ा लीजिए, बाद में घटा दीजिए।
कहीं से भी पहुँच: internet हो तो किसी भी जगह से काम।
रख-रखाव कंपनी का: hardware ख़राब होने की चिंता आपकी नहीं।

सीमाएँ जो ध्यान में रखनी चाहिए

Internet पर निर्भरता: connection गया तो काम रुक जाता है।
Data किसी और के पास: संवेदनशील जानकारी के लिए यह बड़ा सवाल है।
लंबे समय में ख़र्च: लगातार भारी इस्तेमाल पर अपना server सस्ता पड़ सकता है।
एक कंपनी में बँध जाना: बाद में provider बदलना आसान नहीं होता।

कुल मिलाकर, छोटी और मँझोली ज़रूरतों के लिए cloud आज सबसे व्यावहारिक विकल्प है। पर यह हर हाल में सस्ता नहीं होता — फ़ैसला अपने इस्तेमाल के pattern को देखकर ही करना चाहिए।

0 comments:

Breaking News